बहुत आए ...मुझसे बेहतर कहने वाले ...और अपनी-अपनी कह कर चले जाने वाले ...कुछ कागज के आरपार होते हुए टेलीवीजन की कगार चढ़ गये ...तो कुछ समय की धार बह ...उस पार ....चले गये ...जो चले गए __कमलेश्वर ,उदयन शर्मा ,सुरेन्द्र प्रताप सिंह _को सादर प्रणाम __धर्मवीर भारती ,डॉ महावीर अधिकारी और शरद जोशी __को राम-राम ....जो और नाम और अनाम जहाँ-जहाँ विराजमान हैं __उन्हें ...वहां -वहां तक साष्टांग ... प्रणाम __
मुझसे बेहतर कहने वाले __शीर्षक है उस सीरीज की आखिरी पेशकश का ...जिसे उस दौर (१९९३-९४) के 'राष्ट्रीय सहारा ' के ../खुला-पन्ना / में...
हरदिल अजीज _उदयन शर्मा _की ख्वाहिश की तामीर के लिए अंजाम दिया गया था._इन लंतरानियों को समोने के लिए नाम दिया गया__मुतफर्रिक __और इस नाचीज ...टिल्लन ...को ...जी ...से नवाजा गया ._वाह ! जनाब अच्छा खेल खेला !! ...आइये फ़िर खेलते हैं _सिलसिला वहीं से पकड़ते हैं ,जहां से छोड़ा गया था। आगे बिढिए ,अगला मजमून पढिये >>>
बुधवार, 22 अक्टूबर 2008
चौकस रहें ...
न घबराएं न अपने आसपास घबराहट पैदा करें _माहौल में और दिमाग में नरमी बनाएँ रखें ...आप के लिए यह बहुत जरुरी है __क्यूंकि आप अपनी हडबडाहट का प्रदर्शन कर , अपने आपको भविष्य - दृष्टा जाहिर करने के फेर अपना और अपने आसपास का खासा नुकसान करेंगे __बेहतर है चौकस रहें .
शनिवार, 18 अक्टूबर 2008
दिल्ली के नाम
इन दिनों दिल्ली की धड़कनें गर्म हैं ...हवाओं में शरारत और फिजाओं मे खनक कुछ इस कदर बढ़ रही है कि ..हर समझदार शरीफ फिलहाल सहमा -सहमा है ._शेयर फेयर रहे नहीं , टिकिट मिलेगा कि नहीं , कल क्या होगा .....संशय और ऊहापोह ...कल की दिल्ली किसी होगी ...सब खैरियत रहे __एक दुआ दिल्ली के नाम ।
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